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राज्य में 7 साल बाद बढ़ेगी जमीन की सरकारी कीमत

Posted by admin on February 28, 2025
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राज्य में 7 साल बाद बढ़ेगी जमीन की सरकारी कीमत

नए सिरे से गाइडलाइन दरें तय करने की तैयारी, दोगुनी हो सकती हैं कीमतें

राज्य सरकार अब 7 साल बाद जमीन की सरकारी कीमत यानी कलेक्टर गाइडलाइन दरों में बदलाव करने की तैयारी कर रही है। पंजीयन विभाग इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है, और संभावना है कि 1 अप्रैल 2025 से नई गाइडलाइन दरें लागू हो सकती हैं।

गाइडलाइन दरों में संभावित बढ़ोतरी

  • पिछली बार 2017 में गाइडलाइन दरों में संशोधन किया गया था।
  • इसके बाद 2022 में समीक्षा तो हुई, लेकिन दरें नहीं बढ़ाई गईं।
  • इस बार कलेक्टर गाइडलाइन दरों में 50% से 100% तक बढ़ोतरी हो सकती है।
  • नए निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वजह से कई इलाकों में जमीन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

गाइडलाइन दरें बढ़ने से होंगे ये प्रभाव

✔ रजिस्ट्री महंगी होगी – जमीन की सरकारी कीमत बढ़ने से स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में बढ़ोतरी होगी।
✔ भूमि अधिग्रहण पर असर – सरकार को भूमि अधिग्रहण के मामलों में अधिक मुआवजा देना होगा, जिससे किसानों और जमीन मालिकों को लाभ होगा।
✔ निवेश पर मामूली प्रभाव – रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेश पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि रियल एस्टेट सेक्टर पहले से महंगाई को समायोजित कर चुका है।

सरकार का रुख और आगे की प्रक्रिया

पंजीयन विभाग ने इस प्रस्ताव पर काम शुरू कर दिया है और जल्द ही इसे उच्च स्तर पर समीक्षा के लिए भेजा जाएगा। यदि सरकार सहमति देती है, तो नई गाइडलाइन दरें 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होंगी।

निष्कर्ष

राज्य में जमीन की सरकारी कीमतें कई वर्षों से स्थिर थीं, लेकिन अब इनके बढ़ने की पूरी संभावना है। इससे आम जनता, जमीन खरीदने वाले निवेशकों और भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले लोगों पर अलग-अलग असर पड़ेगा।

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